POCSO आदेशों को लेकर सुर्खियों में आईं बॉम्बे HC की जज को स्थायी करने की सिफारिश SC कॉलेजियम ने वापस लिया

POCSO आदेशों को लेकर सुर्खियों में आईं बॉम्बे HC की जज को स्थायी करने की सिफारिश SC कॉलेजियम ने वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के एक अतिरिक्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति पी वी गनेदीवाला की नियुक्ति के प्रस्ताव पर अपनी मंजूरी वापस ले ली है, क्योंकि उन्होने यौन शोषण के मामलों में दो विवादास्पद फैसले दिये है।

एक सूत्र के अनुसार, यह निर्णय तब लिया गया जब न्यायाधीश ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न की व्याख्या के लिए कड़ी आलोचना का सामना किया।

19 जनवरी को, न्यायमूर्ति पुष्पा गनेदीवाला ने एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया। उस आदमी ने एक 12 साल की लड़की के साथ यौन उत्पीड़न किया लेकिन गनेदीवाला ने कहा कि उसने त्वचा से त्वचा का संपर्क नहीं बनाया है; इसलिए यह यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न मे नहीं आता है। बुधवार को शीर्ष अदालत ने फैसले पे रोक लगाई।

एक अन्य फैसले में गनेदीवाला ने कहा कि पांच साल की बच्ची का हाथ पकड़ना और नाबालिग के सामने पतलून उतारना POCSO अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न की परिभाषा में नहीं आएगा।

20 जनवरी को एक बैठक में, भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोदबे की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति गनेदीवाला को बॉम्बे उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। फिर मंजूरी कानून मंत्रालय को भेज दी गई।

यह सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ जजों के आरक्षण के बावजूद की गई थी। बंद दरवाजे की बातचीत में जस्टिस एएम खानविल्कर और डी वाई चंद्रचूड़ ने जस्टिस गनेदीवाला को हाईकोर्ट का स्थायी जज बनाने के खिलाफ अपना कड़ा आरक्षण दोहराया था। आखिरकार, जस्टिस खानविल्कर और चंद्रचूड़ कॉलेजियम के एक सदस्य को इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए अपनी सहमति वापस लेने के लिए राजी करने में सक्षम थे।

सीजेआई के अलावा, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में जस्टिस एनवी रमना और आरएफ नरीमन शामिल हैं। कॉलेजियम सरकार को किए गए भूत कम सिफारिशों को वापस लेता है।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कॉलेजियम अब सोचता है कि गनेदीवाला को एक या दो साल के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का मानना ​​है कि POCSO अधिनियम के उद्देश्य और उद्देश्य के बारे में उन्हे सचेत रहने की आवश्यकता है।

जस्टिस पुष्पा वीरेंद्र गनेदीवाला का जन्म 3 मार्च, 1969 को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के परतावाड़ा में हुआ था। 2007 में, उन्हें सीधे जिला न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया और 13 फरवरी, 2019 को बॉम्बे उच्च न्यायालय के एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।

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