व्हाट्सऐप से भारतीय पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी

व्हाट्सऐप से भारतीय पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी

मैसेजिंग ऐप, व्हाट्सऐप के मुताबिक इसराइल में बने स्पाईवेयर से दुनियाभर के जिन 14,00 लोगों को निशाना बनाया गया उनमें भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी शामिल हैं.

जिन भारतीयों को निशाना बनाया गया उनमें भीमा कोरेगांव मामले में कई अभियुक्तों का प्रतिनिधित्व कर रहे मानवाधिकार वकील निहालसिंह राठौड़ भी हैं.
भारत के संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक बयान में कहा कि सरकार व्हाट्सऐप पर नागरिकों की निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित है. उन्होंने कहा कि सरकार, सभी भारतीय नागरिकों की निजता की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.

व्हाट्सऐप ने बुधवार को एनएसओ समूह के ख़िलाफ़ यह मामला दर्ज कराया कि ये समूह अप्रैल और मई में हुए उस साइबर हमले के पीछे है. हालांकि निगरानी के लिए सॉफ्टवेयर बनाने वाली इस इसराइली कंपनी ने आरोपों को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया है.

भारत में व्हाट्सऐप के 40 करोड़ यूज़र्स हैं, लिहाजा भारत उनके लिए सबसे बड़ा बाज़ार है.

मैसेजिंग ऐप की एक बड़ी खामी का फ़ायदा उठाकर हैकर्स ने फ़ोन और दूसरे उपकरणों में दूर बैठकर ही ये निगरानी सॉफ्टवेयर डाल दिया.

व्हाट्सऐप ने एक बयान में कहा, “हमे लगता है कि इस हमले में कम से कम सिविल सोसाइटी के 100 सदस्यों को निशाना बनाया गया है ,जो पहले नहीं देखा गया है.”

मई में साइबर अटैक का पता लगने के बाद, व्हाट्सऐप ने अपनी खामी को ठीक करने के लिए तुरंत कदम उठाया और उनके सिस्टम में “नए प्रोटेक्शन” और अपडटे्स जारी किए.

टोरेंटो स्थित वॉचडॉग सिटिज़न लैब के साइबर एक्सपर्ट ने मामलों की पहचान करने में व्हाट्सऐप की मदद की, जिसमें पता चला की जिन लोगों को निशाना बनाया गया है, उनमें मानवाधिकारों की वकालत करने वाले लोग या पत्रकार शामिल हैं.

सिटिज़न लैब ने कहा कि, “उसने 100 ऐसे मामलों की पहचान की है, जिसमें दुनियाभर के कम से कम 20 देशों के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को निशाना बनाया गया. ये अफ्रीका, एशिया, यूरोप, मध्य पूर्व और उत्तरी अमरीका के रहने वाले हैं.”

आनंद तेलतुंबड़े ने बीबीसी से कहा कि उन्हें आठ दिन पहले सिटिज़न लैब से फ़ोन आया था. फ़ोन पर बताया गया कि उनकी प्रोफाइल की निगरानी की जा रही है.

तेलतुंबड़े ने कहा, “इस जासूसी के पीछे सरकार है और इसमें कोई शक नहीं है, क्योंकि एनएसओ कपंनी सिर्फ सरकारों को अपनी सेवा देती है. सबको पता है कि ये मेरे साथ क्यों किया गया.”

भीमा-कोरोगांव हिंसा मामले में आनंद तेलतुंबड़े के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है और फिलहाल वो ज़मानत पर हैं.

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