भाजपा के खिलाफ एकजुट हुए 19 दलों के विपक्षी नेता

भाजपा के खिलाफ एकजुट हुए 19 दलों के विपक्षी नेता

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारतीय जनता पार्टी  (बीजेपी) को 2024 के लोकसभा चुनाव में हराने और संविधान के सिद्धांतों का पालन करने वाली और स्वतंत्रता आंदोलन के मूल्यों में विश्वास करने वाली सरकार बनाना के ‘अंतिम लक्ष्य’ को प्राप्त करने के उद्देश्य से शुक्रवार, 20 अगस्त को टीएमसी,  , एनसीपी और डीएमके के प्रमुखों सहित 19 दलों के विपक्षी नेताओं के साथ एक आभासी बैठक की। । उन्होंने आम आदमी पार्टी को आमंत्रित नहीं किया, जबकि उन्होंने बसपा को अन्य 19 पार्टी नेताओं के साथ एकजुट होने के लिए आमंत्रित किया, लेकिन बसपा ने उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

वर्चुअल मीटिंग के परिणामस्वरूप एक संयुक्त बयान जारी किया गया है जिसमें उन्होंने 11 मांगें उठाईं और कहा कि भारत के लोगों को हमारे धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक रिपब्लिकन आदेश की रक्षा के लिए इस अवसर पर उठने की जरूरत है, और संयुक्त विरोध के लिए एक घोषणा की गई थी जो की 20 से 30 सितंबर के बीच होगी

कांग्रेस ने ट्वीट किया, “हम भारत के लोगों से आह्वान करते हैं कि वे अपनी धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक रिपब्लिकन व्यवस्था की पूरी ताकत से रक्षा करने के लिए आगे आएं। आज भारत को बचाइए, ताकि हम इसे बेहतर कल के लिए बदल सकें।

चूंकि पिछला संसद सत्र पूरी तरह से बर्बाद हो गया था, नेताओं का मानना है कि उसी वजह से उन्हें खुद को व्यक्त करने का उचित अवसर नहीं मिल पाया इसी कारणवश उन्होंने इस वर्चुअल मीट का आयोजन किया और हमारे देश के सामने मौजूद मौजूदा मुद्दों पर चर्चा की। संयुक्त बैठक में उठाई गई 11 मांगों में से कुछ मांगे ये है की , कोविड टीकाकरण अभियान को बढ़ाना, महामारी का प्रबंधन, 3 कृषि कानूनों को रद्द करना और पेगासस स्पाइवेयर के कथित उपयोग की न्यायिक जांच करवाना।

विपक्षी के एकजुटता के रास्ते में अक्सर आने वाले एक केंद्रीय मुद्दे को संबोधित करते हुए, सुश्री ममता बनर्जी ने कहा कि पार्टियों को यह भूल जाना चाहिए कि नेता कौन है क्योंकि भारत के लोग भाजपा के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व करेंगे।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उद्धव ठाकरे ने सुश्री बनर्जी के दृष्टिकोण को अपनाया और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने यह मुद्दा उठाया कि कैसे केंद्र सरकार ने हमारे राष्ट्र के संघवाद को तोड़ दिया है।

     

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