धारा 370 निर्रस्त: ऐतिहासिक कदम

धारा 370 निर्रस्त: ऐतिहासिक कदम

मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल-370 को निरस्त कर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. अनुच्छेद 370 लगे होने से आजादी के लगभग सात दशक के बाद भी जम्मू कश्मीर को स्वायत्तता का दर्जा दिया गया था.

आज हम अपने इस लेख में आपको इस ऐतिहासिक कदम को राजनीतिक दृष्टि से समझाने की कोशिश करेंगे.

  • पहला राजनीतिक तथ्य है कि जम्मू और कश्मीर अब विशेष राज्य का दर्जा नहीं है, जिसका मतलब है कि घाटी के क्षेत्रीय दलों (जैसे एनसी, पीडीपी) के नेतृत्व वाली पाकिस्तान उन्मुख भारत विरोधी राजनीति पूरी तरह से नहीं होगी।
  • चूंकि केंद्र सरकार के पास इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाने का पूरा अधिकार है, इसलिए जम्मू कश्मीर राज्य सही मायने में भारत का अभिन्न अंग बन गया है. क्योंकि सरकार द्वारा संचालित नीतियां और योजनाएं राज्य की आबादी की बेहतरी के लिए प्रत्यक्ष, प्रभावित और कार्यान्वित होंगी।
  • इस अनुच्छेद के बाद कांग्रेस पार्टी ने खुद को उजागर किया है और पार्टी दो गुटों में बंट गई है. आपको बता दे कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद इस फैसले को वापिस लेने की मांग कर रहे है दूसरी ओर कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसका समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला राष्ट्रहित के लिए है.
  • इस ऐतिहासिक कदम ने एनडीटीवी जैसे वाम-उदारवादी मीडिया के पाखंड का भी  पर्दाफाश किया है, जिसने पहले जम्मू-कश्मीर को अभिन्न अंग बताते हुए ट्वीट किया था लेकिन बाद में इसे हटा दिया।
  • इस बार पहला वैश्विक निवेश शिखर सम्मेलन 12-14 अक्टूबर तक जम्मू कश्मीर में आयोजित किया जाएगा. लद्दाख जम्मू कश्मीर से मुक्त होने के बाद अब अपनी पहचान खुद बनाएगा और चीजें फिर से सामान्य हो जायेंगी.
  • जम्मू-कश्मीर जहाँ पर स्कूल, अस्पताल, बैंक, जीवन की लगभग सारी गतिविधियां केंद्रीय सुरक्षा बलों की संरक्षित परत के भीतर ही होती थी, अब इस राज्य का एक नया रूप देखने को मिलेगा.
  • प्रधानमंत्री मोदी के नेत्रत्व के अन्दर अब यह राज्य अब भारतीय बनने के लिए तैयार है जो सरदार पटेल का अधुरा सपना था. इस सपने को पूरा करने में गृह मंत्री अमित शाह का पूरा सहयोग रहा है.

अब एक भारतीय के रूप में मैं, आप और हम सभी अपनी आंखों में डर के बजाय सम्मान के साथ लाल चौक, श्रीनगर में तिरंगा फ़हरा सकते है.

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