डीआर कांगो के माउंट न्यारागोंगो में ज्वालामुखी फटने से 15 लोगों की मौत

डीआर कांगो के माउंट न्यारागोंगो में ज्वालामुखी फटने से 15 लोगों की मौत

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के उत्तरी किवु में माउंट न्यारागोंगो ज्वालामुखी के फटने से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई। विस्फोट में सैकड़ों घर और बड़ी इमारतें भी दब गईं।

शनिवार को, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में माउंट न्यारागोंगो लगभग दो दशकों में पहली बार फटा। ज्वालामुखी विस्फोट ने लावा को एक प्रमुख राजमार्ग पर भेज दिया और साथ ही रात के आसमान को लाल कर दिया। करीब 20 लाख की आबादी वाले शहर गोमा के बाहरी इलाके में रविवार सुबह करीब 4 बजे लावा रुका।

गोमा से भागने की कोशिश करने वाले हजारों घबराए हुए निवासी रातों-रात सुनसान इलाकों में अपने घरों को लौटने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि ज्वालामुखी से लावा निकला जिसने शहर के बाहरी इलाके में घरों को नष्ट कर दिया।

सिन्हुआ ने बताया कि डीआरसी सरकार के प्रवक्ता पैट्रिक मुयाया ने कहा कि लावा से भागते समय 15 लोग मारे गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रक पलटने से हुए हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई। चार अन्य पीड़ित कैदी थे जो गोमा में मुंज़ेन्ज़ केंद्रीय जेल को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।

पैट्रिक मुयाया ने बताया कि रविवार सुबह दो और लोगों की जलकर मौत हो गई।

अधिकारियों ने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना है क्योंकि अधिकारी सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में पहुँच रहे हैं। सरकार के प्रवक्ता ने निवासियों से गैर-आवश्यक गतिविधियों से बचने का आग्रह किया, क्यूंकी क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि अभी भी नुकसान पहुंचा सकती है।

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) के अनुसार, 170 से अधिक बच्चों के लापता होने की आशंका है और 150 अन्य को परिवारों से अलग हो चुके है। यूनिसेफ ने कहा कि अकेले नाबालिगों की मदद के लिए केंद्र बनाए जाएंगे।

स्थिति की बारीकी से निगरानी करने के लिए, डीआरसी में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के हेलीकॉप्टरों ने लगातार टोही उड़ानें भरीं।

माउंट न्यारागोंगो ज्वालामुखी दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। ज्वालामुखी का पिछला विस्फोट 2002 में हुआ था। उस समय डीआरसी में 250 लोग मारे गए थे और 120,000 बेघर हो गए थे। न्यारागोंगो का सबसे घातक विस्फोट 1977 में हुआ था, जब 600 से अधिक लोग मारे गए थे।

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