ट्विटर और केंद्र को फेक न्यूज़ और फर्जी मैसेज के चलते सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

ट्विटर और केंद्र को फेक न्यूज़ और फर्जी मैसेज के चलते सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता विनीत गोयनका द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और ट्विटर को नोटिस जारी किया, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर ट्विटर पर कंटेंट के विनियमन की मांग की गई है।

भारतीय जनता पार्टी के नेता विनीत गोयनका।

भारतीय जनता पार्टी के नेता, विनीत गोयनका ने एक जनहित याचिका दायर की और ट्विटर पर घृणित विज्ञापनों और भारत-विरोधी कंटेंट को दिखाने के लिए एक तंत्र की मांग की। इस कंटेंट मे एसी सामग्री हो सकती है जो घृणित, भड़काऊ या देशद्रोही हो। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अश्विनी कुमार दुबे ने जनहित याचिका दायर कर सोशल मीडिया पर फर्जी खातों से फर्जी खबरों, भुगतान की गई सामग्री या विज्ञापनों की जांच के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि इस मामले को सोशल मीडिया विनियमन की मांग करने वाली समान याचिकाओं के एक समूह के साथ टैग किया जाए।

याचिका में कहा गया है, “ये फर्जी ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट संवैधानिक अधिकारियों और प्रख्यात नागरिकों की वास्तविक तस्वीर का उपयोग करते हैं। इसलिए, आम आदमी इन ट्विटर हैंडल और फेसबुक अकाउंट से प्रकाशित संदेशों पर भरोसा करता है।”

जनहित याचिका के अनुसार, फर्जी खबरें इस साल हुए कई दंगों की शुरुआत का मूल कारण हैं। फर्जी खातों का उपयोग जातिवाद और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है जो भारत की एकता को खतरे में डालता है। इसके अलावा, याचिका भारत-विरोधी संदेशों पर रोक लगाना चाहती है क्योंकि वे विषैले संदेशों को फैलाकर देश में हिंसा को बढ़ावा देते हैं।

शीर्ष अदालत की यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब ट्विटर और केंद्र सरकार किसानों के विरोध के सिलसिले में 1,300 से अधिक सोशल मीडिया खातों के ऊपर एक दूसरे का सामना कर रहे हैं।

गुरुवार को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी कि अगर कंपनियां कथित भड़काऊ सामग्री पर शिकंजा नहीं कसती हैं, तो मंत्रालय उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। प्रसाद ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का अपना स्वयं का नियामक तंत्र है, इसका मतलब यह नहीं है कि वे भारतीय नियमों का पालन नहीं करेंगे। सोशल मीडिया कंपनियों को देश के कानून का पूरी तरह से पालन करना होगा।

सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि सरकार मीडिया और व्यक्तियों के अधिकारों की स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन यह देश में सुरक्षा और कानून व्यवस्था के बारे में समान रूप से चिंतित है।

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