चार एजेंसियों की चार वर्ष तक जांच; निष्कर्ष शून्य

चार एजेंसियों की चार वर्ष तक जांच; निष्कर्ष शून्य

2015 में पुलिस द्वारा धरने को उठाने के लिए किये गए बल प्रयोग के दौरान हुई आगजनी की तस्वीर

अक्सर कहा जाता है कि भारत में गरीब व्यक्ति को इंसाफ नहीं मिलता अथवा कानून सिर्फ गरीबों पर ही लागू होता है जबकि अमीर लोग कानून के साथ खेल जाते हैं। परन्तु पंजाब में 2015 में हुई श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी किसी अमीर या गरीब से नहीं बल्कि पूरी सिख कौम से जुड़ी हुई थी। पंजाब में गत् विधानसभा चुनावों में भी सत्तासीन होने वाले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने अपनी चुनावी वायदों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी कांड के दोषियों को सजा दिलाने के वायदे को प्रमुख तौर पर रखा था। लेकिन उक्त काण्ड को हुए आज चार साल बीत चुके हैं इसके बावजूद चार-चार एजेंसियों की जांच के पश्चात भी परिणाम शून्य है। चार वर्ष बीत जाने के पश्चात भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। हालांकि सिख संगत ने आरोपियों को पकड़े जाने की मांग को लेकर लंबे समय तक संघर्ष भी किया। लेकिन बात सरकारी वायदों व आश्वासनों से आगे नहीं बढ़ी।

क्या है मामला
उल्लेखनीय है कि 1 जून 2015 को जिला फरीदकोट के गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से पावन ग्रंथ की चोरी हुई थी। इसके पश्चात 12 अक्टूबर को जिले के गांव बरगाड़ी के बाहर पावन ग्रंथ की बेअदबी हुई। जिसके पश्चात सिख संगत आक्रोश में आ गई। क्योंकि मामला उनके गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का था। जिसके चलते गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले आरोपियों को गिरफतार करने की मांग को लेकर राज्य भर से सिख श्रद्धालु कोटकपूरा पहुंचने शुरु हो गए और हजारों की सं2या में एकत्रित होकर सिख श्रद्धालुओं ने कोटकपूरा के लाईटों वाले चौंक में धरना शुरु कर दिया। जिन्हें हटाने के लिए तत्कालीन उच्च पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ राजनैतिक हस्तियां भी धरने पर पहुंची और आश्वासन दिए गए। परन्तु सिख संगत अपनी मांग पर डटी रही। इसके पश्चात पंजाब पुलिस द्वारा 14 अक्टूबर 2015 को सुबह सवेरे धरने को हटाने के लिए बल का प्रयोग किया गया। जिसके चलते लगभग 100 व्यक्ति घायल हुए। दूसरी ओर इसी दिन इंसाफ की मांग को लेकर गांव बहिबल कलां के नजदीक भी सिख संगत ने हाईवे पर धरना लगाया था। जहां पुलिस द्वारा फायरिंग करने के चलते धरने में शामिल दो नौजवानों की मृत्यू हो गई थी। तब से लेकर अब तक इस पूरे मामले को चार वर्ष बीत चुके हैं। इस मामले के पश्चात सिख संगत द्वारा अनेकों बार रोष प्रदर्शन व धरने आदि दिए जाते रहे। इतना ही नहीं सिख जत्थेबंदियों द्वारा बेअदबी काण्ड के आरोपियों की गिरफतारी की मांग को लेकर कोटकपूरा के कस्बे बरगाड़ी की अनाज मंडी में 1 जून 2018 से 9 दिसंबर 2018 तक मोर्चा भी लगाया गया। लेकिन जांच का निष्कर्ष वही ढाक के तीन पात रहा और पुलिस के अतिरिक्त चार-चार एजेंसियों द्वारा मामले की जांच का परिणाम आज तक शून्य है। इतना ही नहीं उक्त गोलीकाण्ड में मारे गए दो सिख नौजवानों के मामले में भी अभी तक परिवार को इंसाफ नहीं मिल पाया है।

इंसाफ की मांग को लेकर सिख सांगत द्वारा किये जा रहे संघर्ष की तत्कालीन फोटो

मामला श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी का

उक्त पूरे मामले में 15 अक्टूबर 2015 को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा एसआईटी व न्यायिक आयोग का गठन करवाया गया। हालांकि इस मामले में एसआईटी ने उक्त मामले में गांव पंजग्राईं निवासी दो भाईयों को गिरफतार किया भी लेकिन बाद में उनकी शमूलियत के कोई सुबूत न मिलने के चलते उन्हें छोड़ दिया गया। इसके अतिरिक्त जस्टिस जोरा सिंह आयोग, जस्टिस रणजीत सिंह आयोग गठित किए जाने के साथ-साथ एसआईटी व सीबीआई द्वारा भी मामले की जांच की गई। इस जांच में डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायी कोटकपूरा निवासी महिंदरपाल सिंह बिट्टु, सुखजिंदर सिंह सन्नी व शक्ति सिंह को भी आरोपी बनाया गया था। जिसके पश्चात 22 जून 2019 को जेल में ही महिंदरपाल बिट्टु की हत्या भी कर दी गई थी। लेकिन 4 जुलाई 2019 को सीबीआई ने उक्त केस में क्लोज़र रिपोर्ट पेश कर दी थी। उधर गोलीकाण्ड में मारे गए नौजवानों की जांच में एसआईटी द्वारा पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा, शिअद के कोटकपूरा से तत्कालीन विधायक मनतार सिंह बराड़, आईजी परमराज सिंह उमरानंगल, एसपी बलजीत सिंह, एसपी परमजीत सिंह पन्नु, एसआई गुरदीप सिंह पंधर के खिलाफ जिला अदालत में चालान पेश किया जा चुका है और उन पर आरोप तय करने की प्रक्रिया चल रही है।

कुल मिला कर पंजाब के इतिहास में हाने वाले इस इतनी बड़ी घटना और इसके इंसाफ के लिए होने वाले बड़े स्तर पर संघर्ष के बावजूद आरोपियों का न पकड़ा जाना बहुत बड़ी बात है। हालांकि इसके लिए जांच एजेंसियों द्वारा हर संभव जांच की गई, कॉल डिटेल्स, डेटा आदि को खंगाला गया। परन्तु फिर भी एजेंसियां आखिर क्यों इन आरोपियों को काबू नहीं कर पाई। जहां यह एक बड़ा प्रशन है वहीं एजेंसियों के पास इसका कोई जवाब नहीं है।

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