कैरेबियाई अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की भारत वापसी पर लगाई तत्काल रोक

कैरेबियाई अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी की भारत वापसी पर लगाई तत्काल रोक

डोमिनिका की एक अदालत ने गुरुवार को भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी की स्वदेश वापसी पर तत्काल रोक लगा दी। यह आदेश उनके वकील द्वारा पूर्वी कैरेबियाई सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण दायर करने के बाद आया है। यह एक रिट है जो किसी कैदी या अन्य बंदी को अदालत के सामने लाने की मांग करती है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि व्यक्ति का कारावास या नजरबंदी वैध है या नहीं।

मेहुल चोकसी को एंटीगुआ और बारबुडा से लापता होने के बाद डोमिनिका में पकड़ लिया गया था, तबसे भारतीय जांचकर्ता उसके भारत प्रत्यावर्तन के लिए जोर दे रहे हैं। गुरुवार को पूर्वी कैरेबियाई सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया और उनके प्रत्यावर्तन पर रोक लगा दी।

अदालत के आदेश में कहा गया है, “यह आदेश प्रतिवादियों को ईमेल और फैक्स द्वारा और व्यक्तिगत रूप से और डगलस चार्ल्स हवाई अड्डे पर आव्रजन प्रमुख को ईमेल और फैक्स द्वारा तुरंत दिया जाना है।”

ईस्टर्न कैरेबियन सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बिरनी स्टीफेंसन ने चोकसी को उनके वकीलों तक पूरी पहुंच का निर्देश दिया।

स्टीफेंसन ने अगली सुनवाई 28 मई (स्थानीय समयानुसार सुबह 9 बजे) के लिए निर्धारित की।

भारतीय मूल के मेहुल चोकसी पर ₹13,578 पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में आरोप लगाया गया है। वह साल 2018 में भारत से वापस भाग गया था और एंटीगुआ में रह रहा था लेकिन रविवार को वह देश छोड़कर भाग गया। डोमिनिका के आपराधिक जांच विभाग ने मंगलवार को भगोड़े कारोबारी को गिरफ्तार कर लिया। उसे कैरेबियाई द्वीप पर इंटरपोल के “येलो नोटिस” के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।

चोकसी के वकील-डोमिनिका में वेन मार्श और भारत में विजय अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि चोकसी का अपहरण उनकी नागरिकता वाले देश एंटीगुआ और बारबुडा से किया गया था। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को रविवार को भारतीय और एंटीगुआन पुलिस अधिकारी अवैध रूप से डोमिनिका ले गए।  

मार्श ने बताया कि उन्हें उनके मुवक्किल तक पहुंच से वंचित कर दिया गया था और 27 मई को ही उन्हें आखिरकार उनसे बात करने की अनुमति दी गई थी।

दोनों वकीलों ने दावा किया है कि चोकसी को प्रताड़ित किया गया। मार्श ने डोमिनिकान्यूज़ऑनलाइनडॉटकॉम को बताया, “उनकी बायीं आंख सूज गई थी, और उनके चेहरे पर गंभीर चोट आई थी। वह लग रहे थे और उनके शरीर पर कई निशान थे। वह मुश्किल से जमीन पर लगे गद्दे से खड़े हो प रहे थे।”

वकीलों के अनुसार, चोकसी का भारत निर्वासन अवैध होगा क्योंकि वह अब भारतीय नागरिक नहीं है। इसके अलावा, भारत में उनका प्रत्यावर्तन कानूनी रूप से जटिल हो सकता है क्योंकि भारत की डोमिनिका के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं है और चोकसी वर्तमान में एंटीगुआन और बारबुडा राष्ट्रीय है।

गुरुवार को एंटीगुआ और बारबुडा के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने कहा कि उन्होंने डोमिनिका से चोकसी को भारत भेजने का अनुरोध किया है।

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